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Wednesday, July 19, 2017

नाचते-नाचते कुछ ऐसे अंदाज में किया प्यार का इजहार, वीडियो हो रहा वायरल


इश्क की खुमारी और नाचने का जुनून जब मिक्स अप हो जाए तो तस्वीर कुछ ऐसी उभरती है। यूट्यूब पर डांस का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कोरियोग्राफर लड़की के साथ नाचते हुए बीच में ही दिल की बात कुछ ऐसे अंदाज में कह देता है कि देखने वालों पर भी जैसे अजब दीवानापन हावी हो जाता है।

यूट्यूब के पेज पर दिए गए लिंक को खंगालने पर पता चला कि बीच डांस में प्रेमिका को प्रपोज करने वाले डांसर का नाम फिल राइट है। फिल राइट फ्लोरिडा से है। 9 साल की उम्र से ही नाच रहे हैं। आज की तारीख में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बड़े कोरियोग्राफरों में इनकी गिनती होती है।

फिल राइट के पेज से इस वीडियो को 15 जुलाई को शेयर किया गया था। खबर लिखे जाने तक यू-ट्यूब पर इस वीडियो को 6 लाख 36 हजार 601 बार देखा जा चुका था। जो भी हो, फिल राइट का अपने प्यार को लेकर अंदाजे-बयां देखने वालों के दिल में घर किए जा रहा है, इसलिए इसे एकबार शेयर करना तो बनता ही है। आप चाहें तो अपनी प्रतिक्रियाएं हमारे कमेंट्स बॉक्स में दे सकते हैं।

देखें वीडियो-

source: firkee.in

Tuesday, July 18, 2017

ऐसा क्या है इस वीडियो में कि लोग आंख नहीं हटा पा रहे!


आपने लोगों को झरने के पानी में चट्टान से छलांग लगाते हुए तो बहुत देखा होगा लेकिन सोशल मीडिया पर एक वीडियो एक खूबसूरत हसीना का वीडियो वायरल हो रहा है जो इंटरनेट पर तहलका मचा रहा है जिसमें दिख रहा है कि, वो एक चट्टान से झरने के पानी में छलांग लगा रही है। इस वीडियो में खास बात यह है कि, यह वीडियो बहुत ही स्लो मोशन में दिख रहा है जिस कारण यह खूबसूरत हसीना इंटरनेट पर तहलका मचा रही है।

ख़बरों के मुताबिक, ये खूबसूरत हसीना गायक और मॉडल मोनिका डोगरा हैं और अब वो टीवी रिएलिटी शो खतरों के खिलाड़ी के आठवें सीजन में हिस्सा लेने वाली हैं। ये वीडियो हाल ही में स्पेन में इसी टीवी शो कि शूटिंग के दौरान का है, जो सोशल मीडिया पर तहलका मचा रहा है।

झरने के पानी में चट्टान से छलांग लगाती गायक और मॉडल मोनिका डोगरा का स्लो मोशन वीडियो लोगों को दीवाना बना रहा है। ये वीडियो इसलिए लोगों को पसंद आ रहा है कि ये एक खुबसुरत जगह का है।

देखें वीडियो-

आपको बता दे गायिका और अभिनेत्री मोनिका डोगरा हिंदी फिल्मों में के लिए भी गीत गा चुकीं हैं। हाल ही में मोनिका ने एक बयान में कहा था कि, “जब ‘फायरफ्लाइस’ आई, मैंने इसके कुछ गीत लिखे थे। उन्होंने ने इसी साल आई फिल्म ‘फायरफ्लाइस’ में पहली बार गीत भी लिखा था।

इस फिल्म में मोनिका ने प्रमुख किरदार भी निभाया था, जो गीत उन्होंने लिखा था वह बेहद भावपूर्ण है। बता दें कि, इस वीडियो को लोग पसंद कर रहें है साथ ही वीडियो देखने के बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया भी दें रहें है।

source: jantakareporter.com

Wednesday, July 12, 2017

एक ऐसा मंदिर जहां जाने से लोगो को लगता है डर!


मंदिरों में जहा लोग बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान के दर्शन करने जाते हैं वहीं भारत में एक ऐसा मंदिर भी है जहां जाने से लोग डरते हैं। ऐसा एक मंदिर उत्तराखंड में है। यहां पर भक्त मंदिर से करीब 30 मीटर दूरी से ही पूजा करते हैं। उत्तराखंड के देवाल स्थित पर्यटन अंधी आस्था के चलते धार्मिक स्थल वाण के लाटू मंदिर में श्रद्धालु अंदर प्रवेश नहीं करते हैं, बल्कि भक्त मंदिर से 30 मीटर दूर परिसर में ही रहकर पूजा करते हैं।

मरने के चार माह बाद इस महिला ने दिया जुड़वा बच्चों को जन्म

अंधी आस्था के चलते मंदिर में आंख पर पट्टी बांधकर केवल पुजारी प्रवेश करता है। इसी रहस्य और अंधी आस्था से यहां हर साल हजारों श्रद्धालु जुटते हैं और आज तक कोई भी भक्त मंदिर के अंदर नहीं गया। अगर मंदिर के अंदर पुजारी बिना आंखों पर पट्टी पर बांधकर जाता है तो वहां से एक तेज रोशनी निकलती है जिससे व्यक्ति अंधा हो जाता है। इसलिए यहां पुजारी हमेशा आंखों पर पट्टी पर अंदर जाता है।

अनोखा मंदिर ! यहां मरा हुआ इंसान भी हो जाता है जिंदा!

वाण में एक परंपरा और भी है। यहां के लोग अपनी बेटियों की विदाई डोली से नहीं बल्कि घोड़े पर बैठाकर करते हैं। इस गांव के लोग लाटू देवता और भगवती को अपना ईष्ट मानते हैं। मान्यता है कि इस गांव से राजजात यात्रा तथा लोकजात यात्रा में भगवती की डोली को ग्रामीण कैलाश ले जाते हैं। गांव के पान सिंह के अनुसार डोली में देवी के अलावा किसी को नहीं बैठाया जाता है, इसलिए बेटियों को घोड़े पर विदा किया जाता है।

source: rochakkhabare.com

Tuesday, July 11, 2017

कॉफी शॉप में बैठकर लिखी गई थी दुनिया के सबसे महान जादूगर की कहानी


हैरी पॉटर के फैन्स आज बहुत खुश हैं. हैरी पॉटर सिरीज की पहली किताब 'हैरी पॉटर एंड दि फिलॉसौफर्स स्टोन' को रिलीज हुए आज पूरे 20 साल हो गए हैं. फैन्स को इस खुशी के बीच थोड़ा आश्चर्य भी जरूर हो रहा होगा कि ये 20 साल इतनी जल्दी कैसे बीत गए.

90 के दशक के आखिरी साल और नई सदी का शुरुआती दौर हैरी पॉटर के ही नाम रहा. जेके रोलिंग जब हैरी पॉटर की सीरीज लिख रही थीं, उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी.

रोलिंग अक्सर किसी कॉफी शॉप में बैठकर हैरी पॉटर की तिलिस्मी दुनिया के किस्से पिरोती थीं और उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि ये किताबें उन्हें दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में ले आएंगी.

साल 2002 में इस किताब पर फिल्में बनने का ट्रेडिशन शुरू हो गया. पहली फिल्म इसी साल आई और आते ही बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया.

उस दौर में शायद ही कोई बच्चा ऐसा होगा जिसने ये किताबें नहीं पढ़ी होंगी या इनपर बनीं फिल्में नहीं देखी होंगी. इन किताबों और फिल्मों ने बच्चों और किशोरों को एक नई जादुई दुनिया से परिचय करवाया था.

हैरी पॉटर की पहली किताब के 20 साल पूरे होने के मौके पर जानिए इस किताब और इस पर बनी फिल्म के बारे में कुछ रोचक किस्से:

1. हरमाईनी ग्रेंजर के किरदार के लिए एमा वाटसन फिट नहीं थीं. दरअसल जे के रोलिंग ने अपनी किताबों में जिन तीन बच्चों का जिक्र किया है वो रूप-रंग में बिलकुल सामान्य थे. एक पढ़ाकू लड़की हरमाईनी ग्रेंजर के रूप में उन्होंने किसी साधारण लुक्स वाली लड़की की कल्पना की थी.

एमा वाटसन से मिलने से पहले रोलिंग ने उनसे फ़ोन पर बात की थी. 60 सेकंड की उन बातचीत में एमा ने रोलिंग को इतना इम्प्रेस कर दिया कि रोलिंग ने उन्हें रोल के लिए फाइनल कर लिया. एमा से मिलने पर रोलिंग को लगा कि वो इस रोल के लिए ज्यादा खूबसूरत हैं लेकिन फिर रोलिंग ने उन्हें इस रोल में स्वीकार लिया.


2. नॉवेल में 'हेडविग दि आउल' हैरी पॉटर का दोस्त है. जब फिल्म के लिए स्क्रीनिंग चल रही थी तो हैरी पॉटर से पहले उसके पालतू उल्लू को इस रोल में कास्ट किया गया था.


3. फिल्म निर्माता चाहते थे कि लेखिका जेके रोलिंग फिल्म में हैरी पॉटर की मां का किरदार निभाएं लेकिन रोलिंग तैयार नहीं हुई. रोलिंग का कहना था कि वो बहुत बुरी एक्ट्रेस हैं और कैमरे के सामने पूरा सीन बिगाड़ देंगी.


4. फिल्म की शूटिंग के दौरान सभी बाल कलाकार सीन में अपना असली होमवर्क करते थे ताकि यह सीन बिलकुल असली लगे.


5. फिल्म की शूटिंग के दौरान डेनियल रेडक्लिफ ने 160 चश्मे बदले थे.


6. जे के रोलिंग की पहली किताब का नाम 'हैरी पॉटर एंड दि फिलॉसौफर्स स्टोन' थी. इस किताब पर बनी फिल्म यूके में इसी नाम से रिलीज हुई थी. लेकिन अमेरिका में इसे 'फिलॉसौफर्स स्टोन' की जगह 'सौसर्स स्टोन' के नाम से रिलीज किया गया. इसके लिए फिल्म के सभी सीन जहां फिलॉसौफर्स स्टोन बोला गया था रीडब किये गए.


7. लेखिका जे के रोलिंग का जन्मदिन 31 जुलाई को होता है. इसीलिए उन्होंने अपनी कहानी के मुख्य किरदार हैरी पॉटर को भी जन्मदिन की यही तारीख दे दी.

source: hindi.news18.com

Monday, July 10, 2017

स्वर्ग से आया इंद्र का घोड़ा, इतना खूबसूरत की बस देखते रह जायेंगे आप


इस दुनिया में घोड़ों की कई तरह की प्रजातियां मौजूद हैं जिनमे से कुछ प्रजातियों के घोड़े बहुत खूबसूरत होते हैं किसी के बाल काफी सुन्दर होते हैं तो किसी का रंग आकर्षक होता है। लेकिन आज हम आपको घोड़े की एक ऐसी प्रजाति के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिसे इस दुनिया का सबसे खूबसूरत जानवर कहा जाता है।

अखल टेके के नाम से प्रसिद्ध ये घोड़े सोने जैसे रंग के होते हैं जिन्हें लोग जानवरों की दुनिया के सुपरमॉडल की संज्ञा भी देते हैं । ये घोड़े इतने खूबसूरत होते हैं की इन्हें देखकर हर कोई कहता है इतना सुन्दर जानवर कभी नहीं देखा। ये घोड़े रौशनी में तो और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देते हैं।


वैसे आपको बता दें की इस प्रजाति के घोड़े सिर्फ रूस और तुर्कमेनिस्तान में ही पाए जाते हैं और तुर्कमेनिस्तान के लोग इन्हें वहां का राष्ट्रीय खज़ाना मानते हैं । वहीँ अगर चीन की बात करें तो चीन में इन्हें “स्वर्ग से आए घोड़े” या “सोने के घोड़े” की संज्ञा दी जाती है। इस तरह के घोड़े बेहद खूबसूरत होने के साथ साथ बहुत ही ताकतवर और फुर्तीले भी होते हैं और ये किसी भी मौसम में रहने के आदि होते हैं।

source: dainiksaveratimes.com

Friday, July 7, 2017

वैज्ञानिकों को मिली 3 अंगुलियों वाली ममी, क्या आपने देखी


दक्षिण अमेरिका की एक गुफा से वैज्ञानिकों के एक दल को तीन अंगुलियों वाली ममी मिली है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि तीन उंगलियों वाली यह ममी किसी एलियन की है।

सेल्‍फ प्री क्‍लेम्‍ड पैरानॉर्मल रिसर्चस के एक ग्रुप की मानें तो उन्‍होंने पेरु के पास नाजका शहर में एक एलियन के कंकाल को ढूंढ़ निकाला है। इस ग्रुप की मानें तो यह एलियन सैकड़ों साल पुराना है।

वैज्ञानिक एलियन होने की वजह इसकी तीन उंगलियां बता रहे हैं। इसका शरीर, सिर इंसानों जैसा ही है। डॉ. कॉन्‍सटंटीन सेंट पीटर्सबर्ग यूनीवर्सिटी में प्रोफेसर हैं ने बताया कि यह मानव भी हो सकता है।


दक्षिण अमेरिका की एक गुफा से वैज्ञानिकों के एक दल को तीन अंगुलियों वाली ममी मिली है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि तीन उंगलियों वाली यह ममी किसी एलियन की है। सेल्‍फ प्री क्‍लेम्‍ड पैरानॉर्मल रिसर्चस के एक ग्रुप की मानें तो उन्‍होंने पेरु के पास नाजका शहर में एक एलियन के कंकाल को ढूंढ़ निकाला है। इस ग्रुप की मानें तो यह एलियन सैकड़ों साल पुराना है। ये भी पढ़ें- लाइव शो में गलती से खा लिया जहर, मौत वैज्ञानिक एलियन होने की वजह इसकी तीन उंगलियां बता रहे हैं। इसका शरीर, सिर इंसानों जैसा ही है। डॉ. कॉन्‍सटंटीन सेंट पीटर्सबर्ग यूनीवर्सिटी में प्रोफेसर हैं ने बताया कि यह मानव भी हो सकता है।

जहां पर यह मिला है वहां इसकी बॉडी सफेद पाउडर में ढंकी हुई थी। जिसे अक्‍सर चीजों को सुरक्षित रखने के लिये प्रयोग में लाया जाता है। इस बॉडी के कॉर्बन डेटिंग सेंपल 245 से 410 ईसा पूर्व के बीच के हैं।

एक यूएफओ एक्‍सपर्ट की मानें तो यह सिर्फ एक प्‍लास्‍टरकास्‍ट मॉडल है।

यूएफओ एक्‍सपर्ट नीगल वाट्सन ने कहा कि मैं प्राचीन काल में मिलने वाले शरीरों का एक्‍सपर्ट नहीं हूं। इसे देखने के बाद ऐसा लगता है कि प्‍लास्‍टरकास्‍ट से हड्डियों के ढांचे को तीन उंगलियों से जोड़ा गया है।

जहां पर यह मिला है वहां इसकी बॉडी सफेद पाउडर में ढंकी हुई थी। जिसे अक्‍सर चीजों को सुरक्षित रखने के लिये प्रयोग में लाया जाता है। इस बॉडी के कॉर्बन डेटिंग सेंपल 245 से 410 ईसा पूर्व के बीच के हैं। एक यूएफओ एक्‍सपर्ट की मानें तो यह सिर्फ एक प्‍लास्‍टरकास्‍ट मॉडल है। ये भी पढ़ें- गजब! यहां सिर्फ 5 मिनट में होता है आंखों का इलाज! यूएफओ एक्‍सपर्ट नीगल वाट्सन ने कहा कि मैं प्राचीन काल में मिलने वाले शरीरों का एक्‍सपर्ट नहीं हूं। इसे देखने के बाद ऐसा लगता है कि प्‍लास्‍टरकास्‍ट से हड्डियों के ढांचे को तीन उंगलियों से जोड़ा गया है।

source: haribhoomi.com

Tuesday, June 20, 2017

क्या कभी देखा है भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मंदिर

Mahatma Gandhi ka Mandir  Read more at: http://www.merahindiblog.com/2017/06/mahatma-gandhi-ka-mandir-aapne-dekha.html

महात्मा गांधी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया था। इस बात को सब भारतवासी मानते हैं। आज तक हमने महात्मा गांधी के स्टेच्यू तो कई जगह देखे हैं। लेकिन क्या आप महात्मा गांधी के मंदिर के बारे में जानते हैं।

ओडिसा के सम्बलपुर जिले में भटारा गांव एक मंदिर ऐसा हैं। जो पूरी तरह से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों को मानते हैं। इस मंदिर में महात्मा गांधी की 6 फीट की मूर्ति है।

1928 में महात्मा गांधी इस गांव में आए थे तब से ही इस गांव के लोग भक्त हैं। यहां पर महात्मा गांधी के सिद्धांतों का पालन किया जाता है। साथ ही पूजा और प्रार्थना के समय उनके उपदेश्य सुनाए जाते हैं।

इस मंदिर के निर्माण के पीछे कारण सदियों से चली आ रही परम्पराएं थी। जिसकी वजह से कई मंदिरों में 'हरिजनों' का प्रवेश वर्जित था। 1971 में जब अभिमन्यु विधायक के समय में इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ।

इस मंदिर के निर्माण में लोगों ने अपने सामथ्र्य के अनुसार सहायता की। मंदिर में रखी महात्मा गांधी की मूर्ति का निर्माण खलीकोट आर्ट कॉलेज के छात्रों ने किया था।

Source: samacharjagat.com

Monday, June 19, 2017

इस चमत्कार मंदिर में लगातार बढ़ रहा है गणेश मूर्ति का आकार


कहते हैं कि भारत चमत्कारों का देश है। कोई गलत नहीं कहते। वाकई कुछ बातें ऐसी हैं जो किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। ऐसी ही एक बात जुड़ी है भगवान गणेश के मंदिर से। कनिपक्कम गणपति मंदिर के बारे में यदि आप नहीं जानते तो कोई बात नहीं हम आपको सुनाते हैं यहां की कहानी जिसे सुनने के बाद आप भी दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे।

- आंध्र प्रदेश स्थित कनिपक्कम विनायक मंदिर नदी के बीचों बीच स्थित है।
- यहां स्थित गणपति की मूर्ति का आकार अपने आप लगातार बढ़ रहा है।
- इसका निर्माण चोल वंश के शासकों ने 11 शताब्दी में करवाया था।
- इसके बाद विजयनगर के शासकों ने वर्ष 1336 में इसका विस्तार किया।

अनूठी है मंदिर की कहानी

कहानी के मुताबिक तीन भाई थे जिनमें से एक गूंगा, दूसरा बहरा और तीसरा अंधा था। तीनों ने मिलकर जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा खरीदा। खेती के लिए पानी की जरुरत थी इसलिए तीनों ने उस कुंए को खोदना शुरू किया जो सूख चुका था। काफी खोदने के बाद पानी निकला। उसके बाद थोड़ा और खोदने पर एक पत्थर दिखाई दिया। जिसे हटाने पर लाल पानी निकला और तीनों भाई सही हो गए। जब ये खबर गांववालों तक पहुंची तो वो भी मौके पर पहुंचे। तभी सभी को वहां प्रकट स्वयंभू गणेशजी की मूर्ति दिखाई दी, जिसे वहीं पानी के बीच ही स्थापित किया गया। आज भी उस कुएं में पानी लबालब रहता है।

बढ़ रहा है मूर्ति का आकार

कहते हैं कि इस मंदिर में मौजूद विनायक की मूर्ति का आकार हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। कहा जाता है कि विनायक की एक भक्त ने उन्हें एक कवच भेंट किया था, लेकिन प्रतिमा का आकार बढऩे की वजह से अब उसे पहनाना मुश्किल हो गया है। करीब 50 साल पहले एक भक्त ने इस मूर्ति के नाप का ब्रेसलेट दान किया था, जो पहले इस मूर्ति के हाथ में सही आता था। लेकिन अब वह ब्रेसलेट मूर्ति के हाथ में नहीं आता।

नदी भी है चमत्कारी
सिर्फ मूर्ति ही नहीं बल्कि जिस नदी के बीचों बीच विनायक विराजमान हैं वो भी चमत्कारी है। कहते हैं संखा और लिखिता नाम के दो भाई थे। वो दोनों कनिपक्कम के लिए निकले, रास्ते में थक जाने पर लिखिता को भूख लगी। उसने एक पेड से आम तोड़ लिया। उसके भाई ने उसकी शिकायत पंचायत में की तो उसके हाथ काट दिए गए। कहते हैं लिखिता ने बाद में कनिपक्कम के पास स्थित इसी नदी में अपने हाथ डाले थे, जिसके बाद उसके हाथ फिर से जुड़ गए। तभी से इस नदी का नाम बहुदा रख दिया गया, जिसका मतलब होता है आम आदमी का हाथ।

Source: ashwaghosh.com

Sunday, June 18, 2017

दुनिया का इकलौता काला शेर, इसकी तस्वीर हर किसी को हैरान कर रही है...


आपने वैसे तो कई प्रजातियों के शेर देखे होंगे लेकिन हमारा दावा है आपने कभी काला शेर नहीं देखा होगा। हाल ही में एक काले शेर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सबका ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

सोशल मीडिया पर इस काले शेर को देखकर सभी हैरान हैं और इसे दुनिया का इकलौता काला शेर कहा जा रहा है क्योंकि आज तक काला शेर नहीं देखा गया है।


इस काले शेर की फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया और टाइटल दिया गया “ये एक दुर्लभ शेर है और दुनिया में इकलौता भी”। काले शेर की ये तस्वीर देखकर वन विभाग वाले भी चौंक गए क्योंकि आज से पहले काला शेर कभी नहीं देखा गया।

ये तस्वीर देखकर आपके भी मन में इसके बारे में जानने की इच्छा होगी। लेकिन बता दे कि इसके पीछे की सच्चाई कुछ और ही है। दरअसल, काले रंग का कोई बब्बर शेर होता ही नहीं है और तस्वीर में जो काला शेर दिख रहा है वो फोटोशॉप की एडिटिंग का कमाल है।

दरअसल ये एक सफ़ेद रंग का बब्बर शेर है जिसे फोटोशॉप की मदद से काला कर दिया गया और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया गया। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीर फैलने के बाद आग की तरह फैल रही है।


Source: http://thehook.news

Wednesday, June 7, 2017

8 साल के इस बच्चे को लोग मानते हैं हनुमान जी का अवतार, करते हैं पूजा


अमृतसर में आठ साल के एक बच्चे को भगवान का अवतार माना जा रहा है। लोग दूर-दूर से उसे देखने और उसका आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं।

दूल्हा सिंह नाम के इस बच्चे की जन्म से ही कमर पर पूंछ है। यही कारण है कि लोग उसको हनुमान का अवतार मानते हैं।

जैसे-जैसे दूल्हा सिंह के बारे में लोगों को पता चलने लगा, सैकड़ों मीलों से दूर लोग उसकी पूंछ को छूकर आशर्वाद लेने पहुंचने लगे।


हालांकि, दूल्हा के गांव के कई बच्चे उसे तंग करने के लिए अलग-अलग नामों से उसे बुलाते हैं।


दूल्हा सिंह कहता है-
“लोग मुझे हर रोज देखने आते हैं। वो मुझसे आशीर्वाद चाहते हैं। मुझे इसका कारण नहीं पता, लेकिन उन्हें लगता है कि मैं हनुमान की तरह हूं। मुझे बुरा नहीं लगता कि मेरी पूंछ है। ये भगवान की देन है, तो ये जैसी है उसे वैसे ही रहना चाहिए।”


दूल्हा सिंह अमृतसर में अपने अंकल साहिब सिंह और आंटी मजीर कौर के साथ रहता है। दूल्हा के अंकल बताते हैं कि एक बार दूल्हा की मां ने उसकी पूंछ कटाने का फैसला लिया था, लेकिन यह करने से ठीक पहले उनकी मृत्यु हो गई।

उसके बाद परिवार ने निर्णय किया कि वे इस बच्चे की पूंछ को नहीं हटाएंगे, क्योंकि उनका ऐसा मानना है कि इसे काटने से किसी तरह का बुरा प्रभाव पड़ सकता हैं।


अब दूल्हा सिंह अपने गांव और कई दूर दराज इलाके के लोगों के लिए आस्था का प्रतीक बन गया है।

Source: topyaps.com

Thursday, June 1, 2017

एक ऐसा गांव जहां सिर्फ और सिर्फ बसते है बौने लोग, क्या है इसका राज?


सामन्य तौर पर हर 20000 इंसानो में से एक इंसान बौना होता है  मतलब इनका प्रतिशत बहुत कम होता है और लगभग आबादी का .005% होता है। लेकिन चीन के शिचुआन प्रांत के दूर दराज़ इलाके में मौजूद गाँव यांग्सी की कहानी ही कुछ अलग है। इस गाँव की लगभग 50 प्रतिशत आबादी बौनी है।

इस गाँव  में रहने वाले 80  में से 36 लोगो की लम्बाई मात्र 2 फ़ीट 1 इंच से लेकर 3 फ़ीट 10 इंच तक है। इतनी अधिक संख्या में लोगो के बौने होने के कारण ही यह गाँव बौनों के गाँव के नाम से प्रसिद्ध है। हालांकि इतनी बड़ी तादाद में लोगो के बौने होने के पीछे क्या रहस्य है इसका पता वैज्ञानिक पिछले 60 सालों में भी नहीं लगा पाये है। आइए बात करते है इसके बारे में…..

लगभग आबादी है बौनी

गांव के बुजुर्गों के मुताबिक उनकी खुशहाल और सुकून भरी जिंदगी कई दशकों पहले ही खत्म हो चुकी थी, जब प्रांत को एक खतरनाक बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था. जिसके बाद से कई स्थानीय लोग अजीबोगरीब हालात से जूझ रहे हैं, जिसमें ज्यादातर 5 से 7 साल के बच्चे हैं। इस उम्र के बाद इन बच्चों की लंबाई रुक जाती है। इसके अलावा वो कई और असमर्थताओं से जूझ रहे हैं और आज भी लगभग इस गाँव की आधी से ज्यादा आबादी बौनों की है।

बहुत पुराने समय से देखने को मिली यह समस्या
इस इलाके में बौनों को देखे जाने की खबरे 1911 से ही आती रही है। 1947 में एक अंग्रेज वैज्ञानिक ने भी इसी इलाके में सैकड़ो बौनों को देखने की बात कही थी। हालांकि आधिकारिक तौर पर  इस खतरनाक बीमारी का पता 1951 में चला जब प्रशासन को पीड़ितों के अंग छोटे होने की शिकायत मिली। 1985 में जब जनगणना हुई तो गांव में ऐसे करीब 119 मामले सामने आए।

समय के साथ ये रुकी नहीं, पीढ़ी दर पीढ़ी ये बीमारी भी आगे बढ़ती गई. इसके डर से लोगों ने गाँव छोड़ कर जाना शुरू कर दिया ताकि  बीमारी उनके बच्चो में ना आये। हालॉकि 60 साल बाद अब जाकर कुछ हालात सुधरे है अब नई पीढ़ी में यह लक्षण कम नज़र आ रहे है।

Souce: ashwaghosh.com

Wednesday, May 31, 2017

इस गांव में क्यों करते है लोग कंस की पूजा! जानिये क्या है सच।


मथुरा के राजा कंस को बुराई का प्रतीत माना जाता है। उसको प्रजा पर अत्याचार करने और विरोधियों को कुचलना उसकी आदत थी। उसने अपने माता-पिता व सगी बहन और बहनोई को कारावास में रखा था। उसकी वजह एक भविष्यवाणी थी जिसके अनुसार देवकी की आठवीं संतान उसका वध करेगी।

आगे चलकर यह भविष्यवाणी सत्य साबित हुई और भगवान कृष्ण ने अवतार लेकर दुराचारी कंस का अंत कर दिया। कंस के एक तरफ तो अत्याचारी, दुराचारी, शोषक आदि बताया गया है। वही पर एक जगह ऐसी है जहां कंस की पूजा होती हैं।

एक क्रूर व्यक्ति की पूजा कैसे हो सकती है। लेकिन लखनऊ से हरदोई की ओर जाते हुए एक गांव में आपको एक बड़ी मूर्ति नजर आएगी। पहली बार देखने पर आप पहचान नहीं पाएंगे कि यह विशालकाय मूर्ति दुराचारी कंस की भी हो सकती है।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि पीढिय़ों से उनके पूर्वज कंस की इस मूर्ति की पूजा करते आए हैं और यह परंपरा आज भी निभाई जा रही है। हालांकि गांव वाले खुद यह नहीं जानते है कि वह कंस की पूजा क्यों करते हैं।

इसके पीछे क्या कारण है या यह परंपरा किन हालातों में और कब शुरू हुई। कोई भी इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकता है कि कुछ जगह ऐसी है जहां पर लोग रावण की पूजा की जाती हैं।

Source: samacharjagat.com

एक ऐसा रहस्यमयी समुद्र, जिसका कहीं कोई भी किनारा नहीं...


समुद्र के किनारे छुट्टियां बिताना कई लोगों का सपना होता है। लोग गोवा इसलिए भी जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें अपनी छुट्टी समुद्र के किनारे पर ही बिताना चाहते हैं। चाहे वो कोई भी नदी हो या समुद्र, सबका कहीं न कहीं किनारा होता ही है, अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो आप गलतफहमी में हैं। जी हां देखिए उस समुद्र का नजारा जिसका कोई नहीं किनारा...

बरमूडा ट्रायंगल से ज्यादा दूर नहीं है,

'सारगासो सी' नाम का एक समुद्र है, जिसका कोई किनारा नहीं है। यकीन मानिए, इस समुद्र का कोई तट या किनारा नहीं है। भगवान ने इसे बिलकुल मजे-मजे में बना डाला है। ये अटलांटिक सागर के पूर्व में  है, इसके आस-पास कई मीलों तक आपको जमीन देखने को नहीं मिलेगी। अगर आप अभी भी इस बात को बकवास समझ रहे हैं तो मानचित्र देख लीजिए।

वहां जाने के बारे में सोचने वालों को बता दें कि ये बरमूडा ट्रायंगल से ज्यादा दूर नहीं है, इसलिए सोचना भी मत।

ये समुद्र हरदम गर्म रहता है

इस समुद्र का नाम एक खास समुद्री घास सारगासम के नाम पर पड़ा है। इस समुद्र में आप बहुत भारी मात्रा में इन घासों को तैरते हुए देख सकते हैं। सबसे मजेदार बात तो ये है कि कोई जमीनी सपोर्ट न होने के कारण ये समुद्र हवा के अनुसार अपनी स्थिति बदलता रहता है। हैरानी की बात ये है कि अटलांटिक में भीषण ठण्ड होने के बावजूद भी ये समुद्र गर्म रहता है।

वाकई प्रकृति ने कई रोचक चीजे बनाई है। अब बताइए ये तो कोई अनूठा चमत्कार ही है न, वरना किस नदी या समुद्र का किनारा नहीं होता?

Source: amarujala.com

Monday, May 29, 2017

एक बाजार ऐसा जहां नहीं है आज भी रुपए का चलन!


भारत की आजादी के इतने वर्ष बाद भी एक बाजार ऐसा है जहां पर भारत की करेंसी यानि रूपया चलन में नहीं हैं। आज भी लोग सामान के बदले सामान ही देते हैं। इस जगह को बासगुड़ा के नाम से जानते हैं। यह छत्तीसगढ़ के बीजापुर से महज 50 किलोमीटर दूर है।

यहां पर एक बड़ा बाजार बासगुड़ा में लगता हैं। जो नक्सली प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से विकास की राह में पिछड़ गया है। यहां पर वनोपज तिखुर, शहद, चिरौंजी और बहुमूल्य जड़ी बूटियों आदि उगाई जाती है। पुलिस और नक्सलियों में हुए संघर्ष की वजह से कई ग्रामीण मारे गए।

आज भी यहां पर सेलर्स मार्केट नहीं बन पाया है और शोषण का दौर जारी है। लोगों ने माना है कि जब तक जागरूकता नहीं आएगी तब तक ये बायर्स मार्केट बना रहेगा।

माना जाता है कि गांव के लोग खड़े नमक का इस्तेमाल करते हैं और वे इसे बासगुड़ा बाजार से लाते हैं। व्यापारी 2 किलोग्राम नमक देकर एक किलोग्राम महुआ लेते हैं। इन दिनों 10 रुपए किलो की दर पर बिक रहे आलू या प्याज के बदले व्यापारी 20 रूपए किलो का महुआ ले रहे हैं।

Source: samacharjagat.com

Saturday, May 27, 2017

ये मंदिर बना है बीयर की बोतलों से, देखने वालों के उड़ गए होश


आपने अब तक घर हो या मंदिर सभी को ईंट, पत्थर, चुना या मिट्टी से बनते हुए देखा होगा। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी की इस दुनिया में एक मंदिर ऐसा भी है जिसे मिट्टी या पत्थरों से नहीं बल्कि बीयर की खाली बोतलों से बनाया गया है। कोई ये सोच भी नहीं सकता है कि बीयर की खाली बोतलों का इस्तेमाल कर इतना सुंदर मंदिर बनाया जा सकता है।


ये मंदिर थाईलैंड में स्थित है। यह मंदिर भगवान बुद्ध का है। इस मंदिर को बौद्ध भिक्षुओं ने बनवाया है। इस मंदिर को 'वाट प महा चेदि खेव' नाम से जाना जाता है।


10 लाख बोतलों का इस्तेमाल
आपको यह जानकर और भी हैरानी होगी बता दें कि इस मंदिर को बनाने में करीब 10 लाख बोतलों का इस्तेमाल किया गया है।


पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना
यहां की दीवारों पर बोतलों से सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं जो देखने में बहुत खूबसूरत लगती हैं। अलग-अलग रंगों की बोतलों से बना यह मंदिर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जब भी कोई थाईलैंड घूमने के लिए आता है तो इस मंदिर में जाना नहीं भूलता है।

Source: rochakkhabare.com

Friday, May 26, 2017

इस रेस्तरां में हर बुधवार 400 गरीबों को मिलता है मुफ्त खाना व कपड़े


सूरत के उधना इलाके का एक होटल 'गोरस रेस्तरां' लगभग 400 गरीबों को हर बुधवार नि:शुल्क भोजन कराता है वो भी बेहतरीन क्वालिटी का।

इतना ही नहीं शहर के लोगों से मिले कपड़े भी गरीबों को प्रदान किए जाते हैं। हर बुधवार को भाेजन के लिए यहां गरीबों की लंबी कतार भी लगती है।

पिनो मेघजानी और दो पार्टनर अंकज कुमार सिंह और दिशुलाल चौधरी द्वारा आठ महीने पहले ही यह रेस्तरां शुरू किया है।

पहले ही संचालकों ने यह निर्णय लिया था कि वे हफ्ते में एक दिन गरीबों को खाना खिलाएंगे क्योंकि दूसरों की सेवा करने का मौका किसी को मुश्किल से मिलता है।

उधना इलाके में गोरस थाली प्रख्यात है। जिसे खाने के लिए शहर के कोने कोने से लोग आते हैं। इस गोरस थाली खिलाने की परंपरा बुधवार से शुरू की गई, इसलिए हर बुधवार यहां गरीबों को खाना खिलाया जाता है।

जब तक लोग खाने से पूरी तरह तृप्त नहीं हो जाते तक तक उन्हें खिलाया जाता है। रेस्तरां संचालक ने एक अभियान भी चलाया है, जिसमें शहर के लोगों से पुराने कपड़े एकत्रित कर गरीबों दिए जाते हैं।

Source: haribhoomi.com

Wednesday, May 24, 2017

इस पार्क में घूमने गए थे ये लोग, मिल गए हीरे, हो गए मालामाल


दुनिया में अजब-गजब किस्से अक्सर ही हम सुनते हैं जो किसी के मन में कई प्रकार के सवाल पैदा कर सकते हैं। और इससे लोगों के बीच उस बात के बारे में जानने की जिज्ञासा इतनी बढ़ जाती है कि वह उसको अपनी आखों से देखने की इच्छा करने लगते हैं। हालांकि कई बार रोचकतापूर्ण किस्से सत्य नहीं भी होते हैं लेकिन आज हम आपको जिसके बारे में बताने वाले हैं, वह एक पार्क के बारे में है, जी हां अमेरिका में स्थित एक ऐसा पार्क जहां उगते हैं हीरे। इस पार्क की सत्यता के बारे में वहां पर गए सैलानियों ने पुष्टि भी की है। आइये जानते हैं आखिर क्या इसके पीछे का माजरा।

अमेरिका का अरकांसास नेशनल पार्क

दरअसल, यह हीरे उगलने वाला पार्क अमेरिका के अरकांसास नेशनल पार्क में स्थित हैं, जहां 37।5 एकड़ जमीन पर हीरे की खादान है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सन्1906 की जांच में हुई पार्क में हीरे की पुष्टि के बावजूद, वहां की सरकार ने यह जगह आम लोगों के लिए खोल दी। और अबतक कई लोग वहां पर जाकर मालामाल बन चुके हैं।

कई लोग बन चुके है मामलाल

हीरे उगलने वाले पार्क का अनुभव कर चुके डेन फ्रेडरिक बताते हैं कि वह वर्ष 2016 में बेटी के साथ वहां गए थे। जहां पर उनको 2 -03 कैरेट का हीरा मिला था। इनके अलावा डीन फिलपुला को भी 2 -01 कैरेट का हीरा मिल चुका है।

हर साल काफी संख्या में आते है लोग यहां

लोगों में हीरे के प्रति दीवानगी हर साल देखते ही बनती है यही वजह है कि हर साल यहां पर किसी न किसी को हीरा जरूर मिलता है। जैसे कि इस वर्ष मार्च में एक युवक को 7-44 कैरेट का हीरा मिला था। हीरा मिलने से अधिक इस बात पर हैरानी है कि युवक को इसके लिए ज्यादा पारिश्रमिक करने की आवश्यकता नहीं उठानी पड़ी थी। उसे केवल 30 मिनट के अंदर ही हीरा मिल गया था। पार्क में हीरे के लिए लोगों की उत्सुकता देखते ही बनती है।

इस वजह से यह पार्क लोगों की नजरों में अन्य पार्कों की तुलना में अधिक प्रिय बन गया है। जहां पर प्रति वर्ष लोगों की संख्या बढ़ ही रही है। और अब तक 75 हजार हीरे मिल चुके हैं। इस तरह, अमेरिका का हीरे उगलने वाले पार्क का किस्सा रोचकता के साथ सत्य भी लगता है क्योंकि वहां पर 1906 के बाद भारी तादाद में हीरे मिले हैं जिनकी संख्या भविष्य में बढ़ भी सकती है ।

Source: ashwaghosh.com

Sunday, May 21, 2017

ये है भड़ास कैफे, जाइए और जमकर निकालिए अपनी भड़ास


जब भयंकर गुस्‍से में होते हो तो आप को मन आसपास की चीजों को तोड़ने फोड़ने का करता होगा। ऐसा होता है क्‍योंकि गुस्‍सा किसी ना किसी तरीके से बाहर निकलता है।

इन्दौर के एक कैफे में जाकर आप जमकार तोड़फोड़ मचा सकते हैं और आप से कोई कुछ नहीं बोलेगा। बोलेगा नहीं पर तोड़फोड़ का कुछ पैसा तो लेगा ना। इस कैफे का नाम भड़ास कैफे है। कैफे का ऐसा नाम शायद पहली बार सुन रहे होंगे। यह अनोखा कैफे मध्य प्रदेश के इन्दौर शहर के चन्द्रनगर क्षेत्र में खुला है। लोग इस कैफे में जी-भर कर तोड़-फोड़ करते हैं और गुस्सा शान्त हो जाने पर खुद को तनावमुक्त महसूस करते हैं।

यहां पर आप को कांच के गिलास, कप, कुर्सी, टीवी, लैपटॉप, कम्प्यूटर, सीपीयू, घड़ी से ले कर हर वह चीज मिलेगी जिसे तोड़ने में आप को मजा आए। गुस्सा निकालने के लिए यहां पंचिंग बैग्स से ले कर गुब्बारे तक मौजूद हैं। 2 रुपए से 5 रुपए तक देकर आप कांच के गिलास तोड़ सकते हैं। 50 रुपये में आप के लिए घड़ी भी है। यहां पर बड़े सामान तोड़ने के लिए आपको और ज्यादा पैसे देने होंगे। नुकसान के मुकाबले यह कीमत कम है। इस कैफे की सबसे खास बात यह है कि यहां आप पर कोई रोक-टोक नहीं है।

आज की भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में लोगों को तनाव और अवसाद से आजाद करने में यह कैफे बहुत मदद करेगा। इस कैफे में तोड़-फोड़ करके वह अपना मन शान्त कर पाएंगे। लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें तोड़-फोड़ से पहले ग्लव्स, हेल्मेट और ट्रैक सूट भी पहनाए जाते हैं। इस कैफे की दीवारों और छत पर हर तरफ नफरत, गुस्सा, गुबार, चीखना जैसे शब्द बड़े-बड़े अक्षरों में लिखे हुए हैं।

यहां के लोगों के लिए यह कैफे नया और अजीबो-गरीब हो सकता है लगे लेकिन विदेशों में बहुत पहले से ही ऐसे भड़ास केन्द्र लोकप्रिय हैं। वहां इन्हें एंगर रूम के नाम से जाना जाता है। लोगों में बढ़ते डिप्रेशन को देखते हुए सबसे पहले एंगर रूम बनाने का ख्‍याल अमेरिका की एक टीनेजर डोना अलेक्जेन्डर के मन में आया । साल 2008 में उसने अपने ऑफिस के लोगों को 5 डॉलर के बदले तोड़-फोड़ करने के लिए अपने गैराज में आमंत्रित किया। लोगों को यह आइडिया पसन्द आया। बाद में अजनबी भी उससे तोड़-फोड़ करने देने का आग्रह करने लगे। आज अमेरिका समेत कई देशों में बहुत से एंगर रूम खुले हुए हैं।

भड़ास कैफे में आप कॉफी की चुस्कियों के साथ अपना मनपसन्द संगीत भी सुन सकते हैं। मैडिटेशन रूम में जा कर ध्यान कर सकते हैं। इस दौरान आपके मोबाइल और दूसरे गैजेट्स आपसे दूर रख दिए जाएंगे। जरूरत महसूस होने पर यह कैफे आपको साइकोलाजिस्‍ट का परामर्श भी दिलवाया जाएगा। आप चाहे अपने बॉस से परेशान हों या बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड का गुस्सा हो पढ़ाई का फ्रस्‍टेशन हो या पति-पत्नी की आपस में न बनती हो। किसी पर बहुत गुस्सा आ रहा हो या किसी का सर फोड़ देने का मन कर रहा हो तो अब मन मारने की जरूरत नहीं।


Source: haribhoomi.com

Saturday, May 20, 2017

मार्च से लेकर जून तक ही नजर आता है यह स्वर्ग का रास्ता, और फिर रहता है गायब


हाल ही में मिली खबरों के अनुसार यह बात सामने आई है की पंजाब के एक शहर में पोंग डैम की झील का पानी का लेवल कम होने पर एक अजीब सा मंदिर उभरकर सामने आया है। जी हाँ हम बात कर रहें है तलवाड़ा की जहाँ पर हाल ही में एक झील का पानी थोड़ा कम हुआ है और उसके कम होने से वहां पर एक बहुत ही खूबसूरत मंदिर नजर आया है जिसे देखने लाखो लोगो का जमावड़ा लग चुका है। लोग दूर दूर से उसे देखने आ रहें है।

आपको बता दें की लोगो का कहना है की इस मंदिर को डूबे 35 साल हो चुके है लेकिन ये वैसे का वैसा ही है। लोगो की मान्यता है की महाभारत काल में पांडव ने इस मंदिर मे स्वर्ग जाने के लिए सीढ़ी बनवाने की कोशिश की थी। जो सफल नहीं हो सकी। इसी के साथ लोग यह भी कह रहें है इस मंदिर में एक बहुत ही बड़ा पिल्लर है, और उस पिल्लर के अंदर 200 सीढ़ियां हैं।

और आपको बता दें की इस मंदिर में पत्थरों पर माता काली की और भगवान गणेश जी के प्रतिमा बनी है। साथ ही मंदिर के अंदर भगवान विष्णु और शेष नाग की मूर्ति रखी हुई है। आइए देखते है इस मंदिर की कुछ तस्वीरें। आपको बता दें की यह मंदिर चार महीने (मार्च से लेकर जून तक) ही नजर आता है।

Source: newstracklive.com

Sunday, May 14, 2017

इस मंदिर में फूल नहीं, चप्पलों की माला चढाई जाती है!


माना जाता है कि भारत में 33 करोड़ देवी देवताओ का वास है , इस बात में कितनी सच्चाई है अब यह तो हमे भी नहीं पता। मंदिर में जाकर आप लोग भी पूजा अर्चना कर के भगवान् पर फूलो की माला चढ़ाते है या कुछ रुपयों का दान आदि करते है लेकिन क्या अपने कभी सुना है कि एक ऐसा मंदिर जहां चप्पलो की माला चढ़ाई जाती है। आप भी यह सुनकर सोच रहे होंगे कि यह कैसा अंधविश्वास है जहाँ मंदिर में ही लोग चप्पलो की माला चढ़ाते है , देखा जाए तो मंदिर में चप्पल भी मंदिर से बाहर उतार कर जाना पड़ता है। जिस मंदिर के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है वहां भक्त देवी मां को खुश करने के लिए चप्पलों की माला चढ़ाते हैं।आइये बताते है आपको इस मंदिर की परम्परा के बारे में।

आखिर क्यों किया जाता है ऐसा

सभी धर्मो के लोगो की अपनी अलग अलग परम्पराएं होती ही कुछ लोग किसी तरीके से अपनी आस्था प्रकट करते है तो कोई किसी तरीके से। कर्नाटक के गुलबर्ग जिले के गोला गांव स्थित एक मंदिर है जिसे लोग लकम्मा देवी मंदिर के नाम से जानते है। इस मंदिर में देवी माँ को प्रसन्न करने के लिए लोग चप्पलें चढ़ाते हैं। लोगो का मानना है कि इससे देवी माँ खुश हो जाती है। मंदिर के सामने एक नीम का पेड़ है जिसमें लोग चप्पल बांधते हैं और देवी से मुराद मांगते हैं। ईनाडु इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मंदिर की एक और खासियत है। यहां मंदिर का पुजारी हिंदू नहीं बल्कि मुसलमान होता है। इस मंदिर में दिवाली के बाद आने पंचमी पर विशेष मेला भी लगता है। हर मंदिर के बाहर जहां प्रसाद की दुकान लगती हैं वहीं इस मंदिर के बाहर चप्पलों की दुकानें दिखाई देती हैं।

क्या है मान्यता

माना जाता है कि पंचमी के दिन मंदिर वाले भक्त अगर माता से मन्नत मांगते समय पेड़ पर चप्पल बांधते हैं और जिन लोगों की मान्यताएं पूरी हो जाती है वह मंदिर में आकर देवी को चप्पलों की माला चढ़ाते हैं। यह परंपरा बहुत पुरानी है जो काफी पुराने समयकाल से चली आ रही है।

मंदिर की कहानी 

गांववालों का मानना है कि बहुत समय पहले की बात है एक बार देवी मां पहाड़ी पर टहल रही थी। उसी वक्त किसी अन्य गांव के देवता की नजर देवी पर पड़ी और उन्होंने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। देवी ने उससे बचने के लिए अपने सिर को जमीन में धंसा लिया। देवी की उसी स्थिति की प्रतिमा उस मंदिर में स्थापित की गयी है और तब से लेकर आज तक माता की मूर्ति उसी तरह इस मंदिर में है और यहां लोग आज भी देवी के पीठ की पूजा करते हैं। लोगों का कहना है कि पहले मंदिर में बैलों की बलि दी जाती थी लेकिन जानवरों की बलि देने पर रोक लगने के बाद बलि देना बंद कर दिया गया। माना जाता है कि मंदिर में जब बलि देना बंद हो गया तो इसके चलते देवी मां क्रोधित हो गई और उन्हें शांत किया गया। और उन्हें शांत करने के लिए बाद में बलि के बदले चप्पल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

फुटवियर का लगता है मेला 
इस गांव की एक ख़ास परंपरा और भी है , दिवाली के बाद पंचमी के दिन इस मंदिर में खास मेला लगता है जो पिछले साल 6 नवंबर को था। इस दिन मंदिर में फुटवियर फेस्टिवल का आयोजन होता है जिसमें देशभर से हजारों लोग पहुंचे और माता के दर्शन करने के साथ ही पेड़ पर चप्पलों को भी बांधा। मंदिर में चप्पल बांधने की परंपरा जरा हटके जरूर है लेकिन इस गांव में लोगो की श्रद्धा और आस्था इतनी ज्यादा है कि बाहर से आने वाला हर व्यक्ति इस चीज को देखकर अचंभित हो जाता है।

Source: Ashwaghosh